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Mere Piya Gaye Swedoon

हेलो,हिन्दुस्तान का होमटून

हेलो,मैं स्विदून से बोल रहा हूँ

मैं अपनी बीवी रीमादेवी से बात करना

चाहता हूँ

मेरे पिया, हो मेरे पिया गये स्विदून

किया है वहाँ से टेलीफून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है


हम छोड़ के हिन्दुस्तान,बहुत पछ्ताये

बहुत पछ्ताये

हुई भूल जो तुम को साथ ना लेकर आए

हम स्विदून की गलियों में,

और तुम हो होमटून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है

मेरी नींद भी खो गयी टाइम डिफरेन्स के मारे

टाइम डिफरेन्स के मारे

मैं अधमुई सी हो गई चिंता के मारे

तुम बिन साजन,

सूनी सूनी बीत रही है जुलाई और जून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है

अजी तुमसे बिछड़के हो गये हम सन्यासी

हम सन्यासी

खा लेते हैं जो मिल जाए

घास फूस बासी

अजी फीका फीका खा के कर रहे गुज़ारा

भूल गये जीरा मिर्ची लहसून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है

अजी बड़ा अजीब देश है ये कैसा

ये कैसा

रात के ग्यारह बजे लगता है

दिन जैसा

अजी धूप से है परेशान

शाम लगे फोरनून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है

मेरे पिया, हो मेरे पिया गये स्विदून

किया है वहाँ से टेलीफून

तुम्हारी याद सताती है,

जिया में आग लगाती है

My version of the famous song. 😀 D has gone abroad to Sweden and Netherlands for three weeks which has made the poet in me rise from slumber. :mrgreen: The original song – click “Mere Piya Gaye Rangoon” and click here for lyrics and meaning.

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एक कविता

जनुअरी में आई प्यारी दीदी,

फेब्रुअरी में हुई मेरी शादी,

मार्च की होली थी एकदम अकेली,

अप्रैल की गर्मी थी बिलकुल थकेली,

मई में गई घूमने किहीम और अलीबाग,

जून भर बनाई चावल दाल मछली और साग,

जुलाई में की खूब कमाई,

अगस्त में एक बार पुणे घूम आई,

सितम्बर कर दिया एकदम कंगाल,

अक्टूबर में बहुत घूमी दुर्गा पंडाल,

नवम्बर में गई घूमने गोवा विथ आल,

दिसम्बर बीता इन दीघा एंड ससुराल,

ये था हिसाब ऑफ़ मेरा बीता हुआ साल,

आप सब का २०११ हो मस्त और खुशहाल